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किसी भी शहर की पहचान वह के लोग, उनका रहन सहन, खानपान, इत्यादि से बनती जाती है, हमारे यवतमाल की बात की जाए तो आज़ाद मैदान मे ब्रिटिश राज के काल से भुजाड़े कुटुंबियों द्वारा बेचा जानेवाला स्वादिष्ट "बूढ़ीचाचीवड़ा" यह यवतमाल की खानपान संस्कृति मे पहचान मानी जानी चाहिए,
इस चीवड़े की शुरुवात श्री रामचंद्र भुजाड़े इन्होने 1946 के आस पास की, 1963 मे उनकी पत्नी अंजनबाई भुजाड़े इन्होने इसे बना के बेचने का कार्य संभाला, उन्ही की वजह से इस स्वादिष्ट चीवड़े को यावतमलकारों ने "बुढ़िचा चीवड़ा" ये नाम दे दिया, आज आज़ाद मैदान जिसे यवतमाल की चौपाटी के नाम से भी जाना जाता है, यहा टहलने आने वाला हर कोई इस स्वादिष्ट चीवडे को चखे बगैर नहीं रह पाता।

 

Chivde wala  
  YAVATMAL ka "Budhicha Chivda" is a delicious and crispy snack  
posted by: Nikhil Yadav, cell: 8055216809
 
     
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